गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में पतिव्रता धर्म की चार श्रेणियों का उल्लेख किया है:
जग पतिब्रता चारि बिधि अहहीं। बेद पुरान संत सब कहहीं॥
उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं॥
उत्तम श्रेणी की पतिव्रता- वह स्त्री, जिसके मन में यह भाव होता है कि उसके पति के अलावा जगत में कोई अन्य पुरुष नहीं है। ऐसी पतिव्रता स्त्री का जीवन अत्यंत आदर्श माना जाता है।
मध्यम परपति देखइ कैसें। भ्राता पिता पुत्र निज जैसें॥
धर्म बिचारि समुझि कुल रहई। सो निकिष्ट त्रिय श्रुति अस कहई॥
मध्यम श्रेणी की पतिव्रता- मध्यम श्रेणी की पतिव्रता पराए पति को कैसे देखती है, जैसे वह अपना सगा भाई, पिता या पुत्र हो (अर्थात समान अवस्था वाले को वह भाई के रूप में देखती है, बड़े को पिता के रूप में और छोटे को पुत्र के रूप में देखती है।) जो धर्म को विचारकर और अपने कुल की मर्यादा समझकर बची रहती है, वह निकृष्ट (निम्न श्रेणी की) स्त्री है, ऐसा वेद कहते हैं
इस प्रकार, एक स्त्री यदि अपने धर्म और कर्तव्यों को समझकर (Wife Responsibilities to Her Husband ) आचरण करती है, तो उसका दांपत्य जीवन सुखमय रहता है और परिवार में सद्भाव बना रहता है। हमें एक सिद्धांत बताया गया था कि “यदि धन नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट हो गया, यदि स्वास्थ्य नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट हो गया, लेकिन यदि चरित्र नष्ट हो गया तो सब कुछ नष्ट हो गया।” यह विचार जीवन के हर पहलू में लागू होता है। वर्तमान समय में, यह सोच कहीं न कहीं धुंधली होती जा रही है, लेकिन आज भी एक चरित्रवान व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में श्रेष्ठ माना जाता है।
चरित्र की शुद्धता को बनाए रखने के लिए हमें रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत महापुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। परिवार में आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए 10-30 मिनट कीर्तन, ठाकुरजी की आरती और पूजन करना लाभकारी होता है। Wife responsibilities to her husband में प्रेम, समर्पण और निष्ठा का विशेष स्थान है, जो वैवाहिक जीवन को सुखमय और संतुलित बनाते हैं
गृहस्थ जीवन में पत्नी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। “Wife responsibilities to her husband” का उल्लेख हमारे शास्त्रों में विस्तार से किया गया है। एक आदर्श पत्नी वही होती है जो अपने पति की सेवा को प्राथमिकता देती है, लेकिन ठाकुरजी की सेवा को भी स्थान देती है।
पति जब ऑफिस जाता है, तो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य होता है कि वह उसका भोजन तैयार करे, टिफिन लगाए, और फिर एकांत में ठाकुरजी की पूजा व भजन करे। उसे अपने पति को भगवान का रूप मानना चाहिए और पर-पुरुष की ओर देखने से बचना चाहिए। साथ ही, ससुरालजनों की सेवा और पति के धर्म के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए। यदि पत्नी इन सभी बातों का पालन करती है, तो वह गृहस्थ जीवन में रहकर भी भगवान की प्राप्ति कर सकती है। Wife responsibilities to her husband में अपने पति के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण आवश्यक हैं।