त्रेतायुग की बात है, जब भगवान श्रीराम, जो कि विष्णु के अंशावतार थे, अपनी पत्नी सीता को खोजते हुए वन-वन भटक रहे थे। इसी यात्रा के दौरान, उन्हें अपने परम भक्त जटायु मिले। जटायु जी ने भगवान श्रीराम को बताया कि रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया है। उनके संघर्षपूर्ण प्रयास के बावजूद, रावण ने उन्हें परास्त कर दिया। जटायु जी की यह सूचना पाकर श्रीराम अत्यंत व्यथित हो गए और उन्हें गले लगाकर मोक्ष प्रदान किया। इसके बाद, श्रीराम सागर तट की ओर बढ़े, जहाँ वे लंका जाने का उपाय सोचने लगे।
Ekadashi Katha के अनुसार, जटायु से सीता माता का पता जानकर श्री रामचन्द्र जी अपनी वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण की तैयारी करने लगे, परंतु सागर के जलजीवों से भरे दुर्गम मार्ग से होकर लंका पहुंचना एक चुनौती बन गया।
भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में दुनिया के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते थे, अत: वे एक आम मानव की भांति चिंतित हो गए। जब उन्हें सागर पार जाने का कोई मार्ग नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने लक्ष्मण से पूछा, “हे लक्ष्मण, इस सागर को पार करने का कोई उपाय मुझे सूझ नहीं रहा। यदि तुम्हारे पास कोई उपाय है तो बताओ।”
श्री रामचन्द्र जी की बात सुनकर लक्ष्मण बोले, “प्रभु, आपसे कोई भी बात छिपी नहीं है, आप स्वयं सर्वसामर्थ्यवान हैं। फिर भी मैं कहूंगा कि यहाँ से आधा योजन दूर परम ज्ञानी वकदाल्भ्य मुनि का निवास है। हमें उनसे ही इसका हल पूछना चाहिए।”
भगवान श्रीराम, लक्ष्मण समेत वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम में पहुंचे और उन्हें प्रणाम करके अपना प्रश्न उनके सामने रख दिया। मुनिवर ने कहा, “हे राम, आप अपनी सेना समेत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें। इस Vijaya Ekadashi Vrat के प्रभाव से आप निश्चित ही समुद्र को पार कर रावण को पराजित कर देंगे।”
विजया एकादशी का पुण्य प्रभाव: श्रीराम की विजय की दिव्य कथा
जब श्रीराम और उनकी सेना ने समुद्र तट पर एकादशी व्रत किया, व्रत के प्रभाव से वानर सेना ने विशाल पत्थरों से पुल का निर्माण किया जो जल में डूबे नहीं। इस पुल को रामसेतु कहा जाता है। इसके बाद, भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की और विभीषण को राजा घोषित करने का संकल्प लिया। श्री रामचन्द्र जी ने तब उक्त तिथि के आने पर अपनी सेना समेत मुनिवर के बताए विधान के अनुसार Vijaya Ekadashi Vrat रखा और सागर पर रामसेतु का निर्माण कर लंका पर चढ़ाई की। श्रीराम और रावण के मध्य भयंकर युद्ध हुआ जिसमें रावण मारा गया। इस प्रकार विजया एकादशी के पुण्य प्रभाव से श्रीराम ने विजय प्राप्त की।
युद्ध में भगवान श्रीराम ने रावण और उसकी सेना का संहार किया। इसी व्रत के प्रभाव से विजय प्राप्त हुई, इसलिए इसे विजया एकादशी कहा जाता है।
Ekadashi Katha पढ़ने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। यह कथा मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे नकारात्मक विचार दूर होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एकादशी व्रत और इसकी कथा का पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा, यह धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाने के साथ-साथ सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
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बहुत ही सुंदर कथा। जय श्री कृष्ण। राधे राधे 🙏🏻🙏🏻
दिल को छू लेने वाली कहानी। इस पावन एकादशी पर हरि बोल और जय श्री राम