Parama Ekadashi —तीन साल में एक बार आने वाला अवसर

Illustration of the Parama Ekadashi story showing the poor Brahmin Sumedhu and his devoted wife Pavitra praying to Lord Vishnu, symbolizing the blessings of Parama Ekadashi Vrat and the journey from poverty to prosperity.
Parama Ekadashi 2025 | Parama Ekadashi Vrat Katha in Hindi | Purushottam Month

✦ Purushottam Month · Adhik Maas Special ✦

Table of Contents

Parama Ekadashi
— तीन साल में एक बार —
यह दुर्लभ व्रत आपका जीवन बदल सकता है

Parama Ekadashi katha, संपूर्ण vrat vidhi, वैज्ञानिक रहस्य और सुमेधु-पवित्रा की पूरी कथा — सब कुछ एक जगह, हिंदी में

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Parama Ekadashi क्या है और क्यों है इतनी खास?

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो एकादशियां आती हैं — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की। साल भर में कुल मिलाकर 24 एकादशियां आती हैं। लेकिन जब हर तीन साल बाद Purushottam Month (अधिक मास) आता है, तो दो अतिरिक्त एकादशियां जुड़ जाती हैं — और इन्हीं में से एक है Parama Ekadashi

"एकादशी" का अर्थ है 11वीं तिथि। यह तिथि हमारी दस इंद्रियों और ग्यारहवें मन को बाहरी दुनिया के शोर-शराबे से हटाकर भगवान की भक्ति में लगाने का प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुशासन है।

"परम" का अर्थ है श्रेष्ठतम — यह एकादशी इतनी दुर्लभ है कि तीन वर्ष में केवल एक बार आती है, और इसका फल साधारण एकादशियों से कई गुना अधिक माना गया है।

Parama Ekadashi अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। यह दुर्लभता ही इसे विशेष बनाती है। जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत रखता है और भगवान विष्णु की उपासना करता है, उसे दारिद्र्य, कष्ट और पाप-बंधनों से मुक्ति मिलती है।

Purushottam Month — भगवान विष्णु का अपना पवित्र महीना

सौर और चंद्र वर्ष की गणना में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन वर्ष बाद एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है — इसे अधिक मास, मलमास या Purushottam Month कहते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस महीने को कोई देवता अपना नाम देने को तैयार नहीं था। तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम "पुरुषोत्तम" दिया और वचन दिया कि इस मास में किए गए दान, तप, व्रत और भजन का फल अनंत गुना होगा।

✨ Purushottam Month की विशेषताएं

🔸 यह महीना हर 3 साल बाद आता है — इसलिए यह दुर्लभ और अत्यंत पुण्यदायी है।

🔸 इस मास में किया गया नाम-जप, कथा-श्रवण, दान और व्रत साधारण महीनों से कहीं अधिक फलदायी है।

🔸 Parama Ekadashi इसी महीने की कृष्ण एकादशी को आती है — अर्थात यह दुर्लभता में भी दुर्लभतम है।

🔸 इस पूरे मास में भगवान विष्णु की विशेष कृपा और आशीर्वाद सभी भक्तों पर बनी रहती है।

Parama Ekadashi Vrat Katha in Hindi — संपूर्ण कथा

parama ekadashi vrat katha in hindi को समझने के लिए हमें पौराणिक काल की एक मर्मस्पर्शी कथा सुननी होगी — जो धैर्य, श्रद्धा और ईश्वर पर अटूट विश्वास का जीवंत उदाहरण है।

📜 Parama Ekadashi Katha — सुमेधु और पवित्रा की संपूर्ण कथा
भाग १

सुमेधु और पवित्रा — दो आत्माएं, एक परीक्षा

पौराणिक काल में एक नगर में सुमेधु नाम का ब्राह्मण रहता था। वह अत्यंत विद्वान, धर्मपरायण और ईश्वर में आस्था रखने वाला था। उसकी पत्नी पवित्रा पतिव्रता, सरल और शांत स्वभाव की थी — नाम के अनुरूप उसका चरित्र वास्तव में पवित्र था।

परंतु इन दोनों की दशा अत्यंत दयनीय थी। निर्धनता इतनी विकट थी कि कई-कई दिन भिक्षा तक नसीब नहीं होती थी और दोनों को भूखे पेट रहना पड़ता था। घर में न अनाज, न वस्त्र, न कोई सुविधा। धर्म-कर्म में इतना समर्पण होने के बावजूद जीवन में इतना कष्ट — यह उनके लिए एक गहरी पीड़ा थी।

भाग २

सुमेधु का निर्णय और पवित्रा की बुद्धिमत्ता

एक दिन दरिद्रता के इस असह्य बोझ से टूटकर सुमेधु ने अपनी पत्नी से कहा — "मैं परदेश जाऊंगा और धन कमाकर लाऊंगा। यहाँ रहने से कुछ नहीं होगा। मेरी योग्यता और धर्म-परायणता भी हमें दो वक्त की रोटी नहीं दिला पा रहे।"

यह सुनकर पवित्रा ने बड़े ही शांत और धैर्यपूर्ण भाव से उत्तर दिया — "स्वामी, व्यक्ति को वही प्राप्त होता है जो उसके भाग्य में लिखा है। परदेश जाने से हमारे कर्म का फल नहीं बदलेगा। हो सकता है कि हमारे पिछले जन्मों के कुछ ऐसे ऋण हैं जो हम इस जन्म में भुगत रहे हैं। इसलिए निराश मत होइए — धैर्य रखिए और ईश्वर पर भरोसा रखिए।"

पत्नी के इन संयमित वचनों ने सुमेधु को कुछ ठहराव दिया। दोनों असमंजस में थे कि क्या करें — तभी वहाँ एक दिव्य घटना घटी।

भाग ३

महर्षि कौड़िन्य का शुभागमन और Parama Ekadashi का रहस्य

उसी समय उनके द्वार पर महर्षि कौड़िन्य का आगमन हुआ। महर्षि त्रिकालदर्शी, ज्ञानी और करुणामयी थे। उन्होंने सुमेधु और पवित्रा की दीन दशा देखी और उनके मन में करुणा जागी।

महर्षि कौड़िन्य ने दोनों को बैठाकर कहा — "हे सुमेधु! आपकी यह दरिद्रता पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है, किंतु इससे मुक्ति पाने का एक अत्यंत सरल और शक्तिशाली उपाय है — वह है Parama Ekadashi का व्रत।"

महर्षि ने आगे कहा — "यह एकादशी Purushottam Month (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष में आती है। इसका नाम 'परम' है क्योंकि यह सभी एकादशियों में श्रेष्ठतम है। जो भक्त इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है।"

भाग ४

महर्षि द्वारा ऐतिहासिक प्रमाण — कुबेर और हरिश्चंद्र की कथाएं

महर्षि कौड़िन्य ने Parama Ekadashi की महिमा को सिद्ध करने के लिए दो महान उदाहरण दिए:

कुबेर की कथा: एक समय धन के देवता कुबेर का वैभव नष्ट हो गया था। उन्होंने Purushottam Month में Parama Ekadashi का व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उन्होंने अपना खोया हुआ समस्त वैभव पुनः प्राप्त किया। आज भी कुबेर को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है — यह सब उस व्रत की शक्ति है।

राजा हरिश्चंद्र की कथा: सत्य के लिए प्रसिद्ध राजा हरिश्चंद्र ने जब अपना राज्य, परिवार और सब कुछ खो दिया था, तब इसी Parama Ekadashi के व्रत की शक्ति से उन्होंने अपना खोया हुआ राज्य और परिवार पुनः प्राप्त किया। उनका जीवन इस व्रत की दिव्य शक्ति का जीता-जागता प्रमाण है।

जब कुबेर और हरिश्चंद्र जैसे महान व्यक्तित्वों को इस व्रत से लाभ मिला, तो एक सच्चे भक्त को क्यों नहीं मिलेगा?

भाग ५

व्रत की विधि और पंचरात्रि का संकल्प

महर्षि कौड़िन्य ने सुमेधु और पवित्रा को पंचरात्रि व्रत की विधि बताई — अर्थात् एकादशी से आरंभ होकर पाँच दिनों तक चलने वाला यह व्रत। उन्होंने कहा:

  • दशमी की रात्रि से ही सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
  • एकादशी को प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं।
  • पूरे दिन जल या फलाहार पर रहें और भजन-कीर्तन करें।
  • रात्रि में जागरण कर भगवान के नाम का जप (Namasmaran/Japa) करें।
  • द्वादशी को प्रातः स्नान कर ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।

सुमेधु और पवित्रा ने महर्षि के चरण छूकर आशीर्वाद लिया और पूर्ण निष्ठा के साथ इस व्रत को करने का संकल्प लिया।

भाग ६

पाँच दिनों का व्रत — अटूट श्रद्धा की परीक्षा

सुमेधु और पवित्रा ने पाँच दिनों तक पंचरात्रि व्रत का पालन किया। भूख और कष्ट के बावजूद उन्होंने अपनी श्रद्धा नहीं छोड़ी। उन्होंने हर रात भगवान विष्णु के नाम का जप किया, भजन गाए और Purushottam Month की महिमा का स्मरण करते रहे।

पवित्रा अपने पति को निरंतर प्रोत्साहित करती रही — "स्वामी, यह कठिन समय अवश्य कटेगा। भगवान की लीला अपरंपार है। जो सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, वह उसे कभी निराश नहीं करते।"

उनकी अटूट निष्ठा और सच्चे मन की भक्ति ने ब्रह्मांड में एक लहर उत्पन्न की।

भाग ७

भगवान विष्णु प्रकट हुए — दारिद्र्य का नाश

पाँचों दिनों के व्रत की पूर्णाहुति पर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उनकी दिव्य कृपा सुमेधु और पवित्रा पर बरसी। जो दरिद्रता उन्हें वर्षों से सता रही थी, वह एक पल में दूर हो गई।

भगवान की कृपा से उनका घर धन-धान्य से भर गया। उन्हें राज्य, सम्मान और सुख-सुविधाएं प्राप्त हुईं। जो पड़ोसी और लोग कभी उनकी दरिद्रता पर हँसते थे, वे अब आश्चर्यचकित हो गए।

सुमेधु और पवित्रा ने हाथ जोड़कर भगवान को प्रणाम किया और कहा — "भगवन्, आपने हमें यह सिखाया कि जीवन की कठिनाइयाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि आपकी ओर मोड़ने के लिए आती हैं।"

यह parama ekadashi katha हमें सिखाती है — सबसे गहरे अंधेरे में भी श्रद्धा की एक लौ काफी है। कठिन समय में धैर्य और ईश्वर पर विश्वास ही असली कुंजी है।

कथा का सार

Parama Ekadashi Katha से क्या सीखें?

इस parama ekadashi vrat katha in hindi से हमें तीन महान जीवन-सूत्र मिलते हैं:

१. कर्म और भाग्य का संतुलन: पवित्रा की समझदारी यह थी कि परिस्थिति बदलने के लिए केवल भौतिक प्रयास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उपाय भी आवश्यक हैं। कर्म और भाग्य दोनों साथ चलते हैं।

२. संत-सत्संग की शक्ति: महर्षि कौड़िन्य का आना संयोग नहीं था। जब हम सच्चे मन से सहायता चाहते हैं तो सही मार्गदर्शक अपने-आप आ जाता है। यही सत्संग और Satsang की शक्ति है।

३. व्रत की निष्ठा: सुमेधु और पवित्रा ने भूखे रहकर भी श्रद्धा नहीं छोड़ी। यह निष्ठा ही असली पूजा है — न कि केवल बाहरी अनुष्ठान।

व्रत विधि — Parama Ekadashi का व्रत कैसे करें?

Parama Ekadashi का व्रत करने की विधि सरल है, लेकिन इसमें मन की शुद्धता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। यहाँ संपूर्ण चरण-दर-चरण विधि दी गई है:

दशमी (एक दिन पहले)

  1. संध्याकाल के बाद सात्विक भोजन करें — तामसिक भोजन (मांस, प्याज, लहसुन) से परहेज करें।
  2. ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को शांत रखें।
  3. भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं।

एकादशी के दिन

  1. ब्रह्ममुहूर्त में (सूर्योदय से पहले) उठें और स्नान करें।
  2. स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  3. तुलसी का पत्ता और पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
  4. व्रत का संकल्प लें — मन में दृढ़ निश्चय करें कि इस पूरे दिन भगवान की भक्ति में रहेंगे।
  5. पूरे दिन नाम जप (Namasmaran / Japa) करें — "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "हरे कृष्ण हरे कृष्ण" का जप करें।
  6. Parama Ekadashi katha का पाठ या श्रवण करें।
  7. रात्रि में जागरण करें — भजन-कीर्तन करें।

द्वादशी (अगले दिन)

  1. प्रातःकाल स्नान करके पूजा करें।
  2. किसी ब्राह्मण, साधु या जरूरतमंद को भोजन और दक्षिणा दें।
  3. तुलसी का पत्ता लेकर पारण (व्रत तोड़ना) करें।
  4. परिवार के साथ सात्विक भोजन ग्रहण करें।

⚠️ ध्यान रखने योग्य बातें

🔸 एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।

🔸 व्रत में फल, दूध, मेवा और सात्विक आहार ग्रहण कर सकते हैं।

🔸 जो लोग पूर्ण उपवास नहीं कर सकते (बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं) वे फलाहार ले सकते हैं।

🔸 व्रत का मूल तत्व है — मन की शुद्धता और भगवान में ध्यान, न केवल भोजन-त्याग।

वैज्ञानिक दृष्टि — उपवास, चंद्रमा और ऑटोफैगी

आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखें तो Parama Ekadashi का व्रत केवल पौराणिक परंपरा नहीं — इसके पीछे ठोस जैविक और न्यूरोसाइंटिफिक कारण हैं।

🌕 चंद्रमा और मानव शरीर का संबंध

हमारा शरीर लगभग 60-70% जल से बना है। ठीक वैसे ही जैसे चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति समुद्र में ज्वार-भाटा पैदा करती है, वैसे ही यह हमारे शरीर के तरल पदार्थों को प्रभावित करती है। पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास मानसिक तनाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। एकादशी तिथि इन दोनों के बीच में आती है — जब शरीर उपवास के लिए सबसे तैयार होता है।

🔬 ऑटोफैगी (Autophagy) — नोबेल पुरस्कार विजेता खोज

2016 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली खोज "ऑटोफैगी" वही प्रक्रिया है जो एकादशी व्रत के दौरान होती है। जब हम 12-24 घंटे का उपवास करते हैं, तो शरीर की कोशिकाएं अपने भीतर जमा खराब, क्षतिग्रस्त और विषैले प्रोटीन को स्वयं साफ करने लगती हैं।

लाभ विज्ञान क्या कहता है
ऑटोफैगी कोशिकाओं की स्व-सफाई — कैंसर और अल्जाइमर का जोखिम कम होता है
मेटाबॉलिज्म Intermittent Fasting से इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है
रक्तचाप उपवास से Systolic BP में औसतन 6-8 mmHg की कमी देखी गई है
इम्यूनिटी उपवास से White Blood Cells पुनर्जीवित होती हैं
मानसिक स्वास्थ्य उपवास से BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) बढ़ता है — मस्तिष्क तेज होता है
आंत-मस्तिष्क संबंध पाचन तंत्र को विश्राम मिलने से Gut-Brain Axis बेहतर होता है

सरल शब्दों में कहें तो — एकादशी व्रत शरीर की एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक servicing है। हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले जो बात श्रद्धा और परंपरा के रूप में सिखाई, वही आज आधुनिक विज्ञान प्रमाणित कर रहा है।

आध्यात्मिक महत्व — आत्मा की यात्रा

हमारे शास्त्रों के अनुसार, मानव जीवन 84 लाख योनियों के चक्र के बाद अत्यंत सौभाग्य से मिलता है। यदि हम इस अनमोल जीवन को केवल धन, पद और भौतिक सुखों के पीछे लगा दें, तो हम इसके मूल उद्देश्य को भूल जाते हैं।

Parama Ekadashi हमें याद दिलाती है कि आध्यात्मिकता कोई बोझ या बुढ़ापे का काम नहीं है। यह वह जीवनशैली है जो हमें:

🧠 तनाव से मुक्ति नाम-जप (Namasmaran) और Satsang चिंता और अवसाद को कम करते हैं।
💧 इंद्रियों पर संयम व्रत हमें यह सिखाता है कि इच्छाओं का दास बनना जरूरी नहीं।
🌱 कर्म का शुद्धिकरण Purushottam Month में किया व्रत पिछले कर्मों के बोझ को हल्का करता है।
🔔 ईश्वर से जुड़ाव जो व्यक्ति भगवान को याद करता है वह जीवन के उतार-चढ़ाव में कभी अकेला नहीं पड़ता।
🏠 पारिवारिक सुख परिवार के साथ व्रत और कथा से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
मोक्ष का मार्ग नियमित एकादशी व्रत जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति की ओर ले जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है — जो मनुष्य मानव देह पाकर भी एकादशी जैसे शुभ अवसरों का लाभ नहीं उठाता, वह बार-बार जन्म-मृत्यु के चक्र में भटकता रहता है।

— विष्णु पुराण

Parama Ekadashi के 9 प्रमुख लाभ

पौराणिक ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान दोनों के आधार पर parama ekadashi katha और इस व्रत के निम्नलिखित लाभ प्रमाणित हैं:

  1. दारिद्र्य-नाश: कुबेर और हरिश्चंद्र की कथाओं से सिद्ध — आर्थिक कष्टों से मुक्ति।
  2. रोग निवारण: ऑटोफैगी प्रक्रिया से कोशिकाओं की सफाई — शरीर स्वस्थ होता है।
  3. मानसिक शांति: नाम-जप और उपवास से मन स्थिर और एकाग्र होता है।
  4. पाप-क्षय: Purushottam Month में व्रत का फल अनंत गुना — पुराने पापों का नाश।
  5. पारिवारिक सुख: घर में सकारात्मक वातावरण और परिवार में प्रेम बढ़ता है।
  6. आत्मबल: व्रत की कठिनाई को पार करने से इच्छाशक्ति और संयम बढ़ता है।
  7. भगवान विष्णु की कृपा: विष्णु-भक्तों के लिए यह सबसे प्रिय व्रतों में से एक है।
  8. मोक्ष-प्राप्ति: नियमित एकादशी व्रत जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
  9. दीर्घायु: वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि Intermittent Fasting जीवन प्रत्याशा बढ़ाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Parama Ekadashi कब आती है? +

Parama Ekadashi हर तीन साल बाद Purushottam Month (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। यह दुर्लभता ही इसे अन्य सभी एकादशियों से अलग और विशेष बनाती है। अपने स्थानीय पंचांग से सटीक तिथि की जानकारी लें।

Parama Ekadashi और सामान्य एकादशी में क्या अंतर है? +

सामान्य एकादशियां हर महीने दो बार आती हैं — साल में 24 बार। Parama Ekadashi विशेष Purushottam Month में आती है जो तीन साल में एक बार होता है। इस महीने को स्वयं भगवान विष्णु ने अपना नाम दिया है, इसलिए इसका पुण्यफल सामान्य एकादशियों से कई गुना अधिक है।

parama ekadashi vrat katha in hindi कहाँ सुनें? +

Parama Ekadashi vrat katha in hindi आप Hare Krishna TV पर सुन सकते हैं। YouTube पर "Hare Krishna TV Parama Ekadashi" सर्च करें या नीचे दिए गए लिंक से Purushottam Month की विशेष कथा देखें।

क्या बच्चे और बुजुर्ग भी Parama Ekadashi व्रत कर सकते हैं? +

हाँ — बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग फलाहार व्रत कर सकते हैं। व्रत का मूल तत्व भोजन-त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता और भगवान का स्मरण है। गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी पूर्ण उपवास न करें — केवल नाम-जप और कथा-श्रवण से भी व्रत का फल प्राप्त होता है।

Parama Ekadashi का व्रत कितने दिनों का होता है? +

parama ekadashi katha के अनुसार सुमेधु और पवित्रा ने पाँच दिनों तक पंचरात्रि व्रत किया। परंतु जो लोग पाँच दिन का व्रत नहीं कर सकते, वे केवल एकादशी के एक दिन का व्रत करके भी फल प्राप्त कर सकते हैं।

क्या Parama Ekadashi के दिन कोई विशेष मंत्र जपना चाहिए? +

Parama Ekadashi के दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", "हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे" या अपने इष्टदेव का कोई भी नाम (Namasmaran / Japa) जप कर सकते हैं। भगवान के नाम में असीम शक्ति है — मन की एकाग्रता के साथ किया गया नाम-जप सर्वोत्तम है।

Purushottam Month में क्या-क्या विशेष करना चाहिए? +

Purushottam Month में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भागवत कथा श्रवण, दान, तुलसी की सेवा और नाम-जप विशेष फलदायी हैं। इस पूरे मास में Parama Ekadashi व्रत का विशेष महत्व है। Satsang में भाग लेना और संतों के प्रवचन सुनना भी इस महीने में अत्यंत पुण्यदायी है।

🪷 हरे कृष्ण 🪷

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© Hare Krishna TV — यह लेख पूर्णतः शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए है।

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