Padmini Ekadashi – कमला एकादशी | पुरुषोत्तमी एकादशी

Lord Vishnu reclining on Sheshnag with lotus flowers and golden divine background representing the sacred festival of Padmini Ekadashi during Adhik Maas.
Padmini Ekadashi 2026 | पद्मिनी एकादशी – तिथि, व्रत विधि, कथा और महत्व | Purushottam Maas
✦ Purushottam Maas Special ✦

पद्मिनी एकादशी 2026
Padmini Ekadashi – कमला एकादशी | पुरुषोत्तमी एकादशी

27 साल बाद ज्येष्ठ मास में बना दुर्लभ योग | Rare Spiritual Opportunity

📅 27 मई 2026, बुधवार
🌙 पुरुषोत्तम मास – शुक्ल एकादशी
पारण: 28 मई 2026

🕐 Padmini Ekadashi 2026 – शुभ मुहूर्त व तिथि विवरण

Vrat Date / व्रत तिथि
27 मई 2026
Wednesday / बुधवार
Ekadashi Tithi Begins
26 मई – 5:10 AM
एकादशी तिथि प्रारंभ (IST)
Ekadashi Tithi Ends
27 मई – 6:21 AM
एकादशी तिथि समाप्त
Parana Time / पारण समय
28 मई 2026
सुबह 5:45 AM – 7:57 AM

⚠️ ये समय IST (Ujjain) के अनुसार हैं। अपने शहर के पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।

🪷 पद्मिनी एकादशी क्या है?

Padmini Ekadashi (पद्मिनी एकादशी) हिन्दू धर्म की सबसे दुर्लभ और पुण्यदायी एकादशियों में से एक है। यह एकादशी अधिक मास (Adhik Maas), जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) भी कहते हैं, के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।

सामान्य हिन्दू वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, किन्तु जब अधिक मास आता है तो उसमें दो अतिरिक्त एकादशियाँ जुड़ जाती हैं – शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी। इनमें से Padmini Ekadashi को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

🌟 विशेष तथ्य – Special Fact

अधिक मास प्रत्येक 32–33 महीनों में एक बार आता है, इसलिए पद्मिनी एकादशी का संयोग भी उतना ही दुर्लभ होता है। 2026 में यह 27 मई को आ रही है और 27 साल बाद ज्येष्ठ मास में ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है।

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📿 तीन नाम, एक एकादशी

इस पवित्र एकादशी को तीन प्रमुख नामों से जाना जाता है, और हर नाम का एक विशेष आध्यात्मिक अर्थ है:

🪷 पद्मिनी एकादशी
Padmini Ekadashi
"पद्म" अर्थात् कमल। जिस प्रकार कमल कीचड़ में खिलकर भी पवित्र रहता है, उसी प्रकार यह व्रत सांसारिक पाप-ताप से मुक्ति दिलाता है।
🌺 कमला एकादशी
Kamala Ekadashi
"कमला" माँ लक्ष्मी का एक नाम है। पद्म पुराण (Padma Purana) में इस एकादशी को कमला एकादशी कहा गया है। यह व्रत माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों को प्रसन्न करता है।
🕉 पुरुषोत्तमी एकादशी
Purushottami Ekadashi
पुरुषोत्तम मास में पड़ने के कारण इसे पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहा जाता है। "पुरुषोत्तम" भगवान विष्णु का वह नाम है जो स्वयं उन्होंने अपने प्रिय मास को दिया।

27 साल बाद दुर्लभ संयोग

2026 में पद्मिनी एकादशी का यह संयोग अत्यंत विशेष है क्योंकि 27 वर्षों के पश्चात ज्येष्ठ मास में अधिक मास (Adhik Maas) का दुर्लभ योग बना है।

📜 पुरुषोत्तम मास क्या है? (What is Purushottam Maas?)

हिन्दू पंचांग में चाँद और सूर्य की गति के बीच के अंतर को ठीक करने के लिए प्रत्येक 32–33 महीनों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

कथा के अनुसार, अन्य महीनों के स्वामी देवता थे किन्तु इस अतिरिक्त माह का कोई स्वामी नहीं था। तब भगवान विष्णु ने स्वयं इस मास को अपना नाम "पुरुषोत्तम" देकर अपनाया। इसीलिए इस माह में किया गया हर धार्मिक कार्य – पूजा, दान, व्रत – कई गुना अधिक पुण्यकारी माना जाता है।

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🙏 पद्मिनी एकादशी का महत्व

स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण और विष्णु पुराण जैसे प्रमुख धर्मग्रन्थों में Padmini Ekadashi के महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी के व्रत का फल इतना अधिक है कि:

📖 "पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह संसार के समस्त तीर्थ-स्थानों की यात्रा के फल के समान है।"

📖 "इस दिन रात्रि के प्रथम प्रहर में जागरण करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।" — पद्म पुराण

📖 "पद्मिनी एकादशी का पुण्य अश्वमेध यज्ञ और वाजपेय यज्ञ से भी अधिक माना गया है।"

🌙 व्रत विधि – Vrat Kaise Karein

दशमी तिथि (व्रत से एक दिन पहले – 26 मई)

  • सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें। प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से परहेज रखें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को शांत रखें।
  • रात में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएँ।

एकादशी तिथि (व्रत का दिन – 27 मई 2026)

  • सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नान करें। यदि संभव हो तो पवित्र नदी, तालाब या कम से कम कुएँ के जल से स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प (Vrat Sankalpa) लें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और पूजा आरंभ करें।
  • पूरे दिन अन्न-जल का त्याग करें अथवा फलाहार करें (अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार)।
  • विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • रात्रि जागरण करें – भजन, कीर्तन और विष्णु नाम का जप करें।
⚠️ व्रत में क्या खाएँ? – Vrat Food Guide

सम्पूर्ण उपवास: केवल जल (पानी) ग्रहण करें।
फलाहार: फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा ले सकते हैं।
पूर्णतः वर्जित: अनाज, दाल, प्याज, लहसुन, मांस, शराब।

🪔 पूजा विधि – Puja Vidhi

  • आसन स्थापना: पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और पीले या लाल आसन पर बैठें।
  • कलश स्थापना: जल से भरे कलश पर पाँच आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें।
  • मूर्ति पूजन: भगवान विष्णु (शालिग्राम) और माँ लक्ष्मी की प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन करें।
  • तुलसी अर्पण: भगवान विष्णु को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें – यह अत्यंत प्रिय है।
  • धूप-दीप: घी का दीपक जलाएँ और धूप अगरबत्ती लगाएँ।
  • भोग अर्पण: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें और फल-मिष्टान चढ़ाएँ।
  • आरती: "ॐ जय जगदीश हरे" एवं विष्णु आरती करें।
  • दान: ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दें।
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🌼 चार चरण पूजा – Four Phase Ritual

पद्मिनी एकादशी पर एक विशेष चतुः-चरण पूजा विधि का विधान है जो इस एकादशी को अन्य सभी से भिन्न बनाती है:

चरण (Phase) सामग्री (Offering) फल (Benefit)
🥥 प्रथम चरण नारियल (Coconut) सुख-समृद्धि की प्राप्ति
🌿 द्वितीय चरण बेल पत्र (Bel Patra) पापों का नाश, शिव-विष्णु एकत्र प्रसन्नता
🍈 तृतीय चरण सीताफल / श्रीफल पुत्र प्राप्ति, पारिवारिक सुख
🍊 चतुर्थ चरण नारंगी + पान-सुपारी मोक्ष प्राप्ति, दिव्य आशीर्वाद

📿 पद्मिनी एकादशी मंत्र

✦ Padmini Ekadashi Sankalp Mantra ✦
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ श्री पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
✦ Vishnu Dwadasha Nama Stotram (विष्णु द्वादश नाम) ✦
ॐ केशवाय नमः | ॐ नारायणाय नमः | ॐ माधवाय नमः
ॐ गोविन्दाय नमः | ॐ विष्णवे नमः | ॐ मधुसूदनाय नमः
ॐ त्रिविक्रमाय नमः | ॐ वामनाय नमः | ॐ श्रीधराय नमः
ॐ हृषीकेशाय नमः | ॐ पद्मनाभाय नमः | ॐ दामोदराय नमः
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📖 पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

पद्मिनी एकादशी की पवित्र व्रत कथा पद्म पुराण में महर्षि दालभ्य और देवर्षि पुलस्त्य के संवाद के रूप में वर्णित है।

🌸 अनुसूया और पुत्र-प्राप्ति की कथा

प्राचीन काल में एक राजा के कुल में एक दंपति था जो पुत्र-प्राप्ति के लिए अनेक वर्षों से तपस्या और व्रत-उपवास कर रहे थे। उन्होंने महर्षि अत्री की पत्नी, महान पतिव्रता अनुसूया माता की शरण ली।

अनुसूया माता ने उन्हें बताया कि अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (पद्मिनी एकादशी) और कृष्ण पक्ष की एकादशी (परमा एकादशी) — इन दोनों का व्रत अत्यंत फलदायी है। इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने पर भगवान विष्णु अवश्य पुत्र-प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं।

उस दंपति ने अनुसूया माता के कहे अनुसार विधिपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और शीघ्र ही उन्हें पुत्र-रत्न की प्राप्ति हुई।

🌊 कार्तवीर्यार्जुन और नाविक की कथा

एक अन्य कथा के अनुसार एक निर्धन नाविक था जो अपने परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से कर पाता था। एक ऋषि ने उसे पद्मिनी एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया।

नाविक ने अत्यंत श्रद्धा से व्रत किया, रात्रि जागरण किया और भगवान का नाम जपता रहा। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे स्वर्ण और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। उसकी निर्धनता दूर हो गई और परिवार में सुख-शान्ति आ गई।

शास्त्र बताते हैं: इस व्रत का पुण्य न केवल इस जन्म के पाप नष्ट करता है, बल्कि कई जन्मों के कर्म-बन्धनों को भी काटता है और अन्त में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

🌅 पारण विधि – Paran on May 28, 2026

⏰ पारण का शुभ समय (28 मई 2026)

Parana Time: प्रातः 5:45 AM – 7:57 AM (IST, Ujjain के अनुसार)

⚠️ महत्वपूर्ण: द्वादशी तिथि 28 मई को 7:57 AM तक रहेगी। इससे पहले पारण करना अनिवार्य है अन्यथा द्वादशी पारण दोष लगता है।

पारण की सही विधि:

  • 28 मई को सूर्योदय से पूर्व उठें (5:25 AM से पहले)। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी दल + जल का आचमन करें। यही पारण की शुरुआत है।
  • इसके बाद सात्विक आहार लें – फल, दूध, खिचड़ी या पंचामृत।
  • 7:57 AM से पहले पारण अवश्य पूरा करें।
  • यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
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🌟 पद्मिनी एकादशी व्रत के लाभ

🧘
आत्मिक शुद्धिSpiritual Purification – मन-बुद्धि के पाप और नकारात्मकता दूर होती है।
💰
धन-समृद्धिWealth & Prosperity – माँ लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है।
👨‍👩‍👧
पुत्र-प्राप्तिOffspring Blessing – निःसंतान दंपति इस व्रत को पुत्र प्राप्ति हेतु रखते हैं।
🏥
स्वास्थ्य लाभHealth Benefits – शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है।
🚫
पाप-नाशSin Removal – जाने-अनजाने हुए पापों का नाश होता है।
🕊️
मोक्ष प्राप्तिLiberation – नियमित और श्रद्धापूर्वक व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🏠
पारिवारिक सुखFamily Harmony – घर में शान्ति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
🎯
कर्म-बन्धन मुक्तिKarmic Release – पिछले जन्मों के कर्मों का भार हल्का होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – FAQ

  • Padmini Ekadashi 2026 की सही तिथि क्या है? (Correct Date)
    पद्मिनी एकादशी 2026 का व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 26 मई को प्रातः 5:10 AM पर प्रारंभ होगी और 27 मई को 6:21 AM पर समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत 27 मई को रखा जाएगा।
  • Padmini Ekadashi को कमला एकादशी क्यों कहते हैं?
    पद्म पुराण में मलमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कमला एकादशी कहा गया है। "कमला" देवी लक्ष्मी का एक नाम है। यह व्रत भगवान नारायण (Narayana) को समर्पित है, जो माँ लक्ष्मी के पति हैं। इस दिन दोनों की पूजा से घर में धन-वैभव की वृद्धि होती है।
  • Purushottam Maas 2026 कब से कब तक है?
    2026 में पुरुषोत्तम मास / अधिक ज्येष्ठ मास का संयोग है। यह अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि 27 साल बाद ज्येष्ठ महीने में अधिक मास पड़ रहा है। इस पूरे मास में पूजा, दान, व्रत और तीर्थ-यात्रा का विशेष महत्व है।
  • पारण (Paran) कब और कैसे करें?
    पारण 28 मई 2026 को प्रातः 5:45 AM से 7:57 AM के बीच करना है। पहले तुलसी और जल से पारण करें, फिर सात्विक भोजन लें। द्वादशी तिथि 7:57 AM को समाप्त होती है, इसलिए उससे पहले पारण अनिवार्य है।
  • क्या बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला यह व्रत कर सकती है?
    हाँ, किन्तु स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। बीमार व्यक्ति और गर्भवती महिलाएँ फलाहार व्रत कर सकती हैं। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो मानसिक संकल्प और नाम-जप से भी व्रत का पुण्य मिलता है। डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • Padmini और Parama Ekadashi में क्या अंतर है?
    अधिक मास में दो एकादशियाँ होती हैं:
    पद्मिनी एकादशी – शुक्ल पक्ष (Waxing Moon) की एकादशी
    परमा एकादशी (Parama Ekadashi) – कृष्ण पक्ष (Waning Moon) की एकादशी
    दोनों ही अत्यंत पुण्यकारी हैं किन्तु पद्मिनी एकादशी को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
  • क्या यह व्रत विदेश में रहने वाले भारतीय भी कर सकते हैं?
    बिल्कुल। Padmini Ekadashi vrat कहीं भी, किसी भी देश में किया जा सकता है। तिथि और समय अपने देश के स्थानीय पंचांग या ऑनलाइन हिन्दू कैलेंडर से देखें। भाव और श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण है।
  • रात्रि जागरण (Night Vigil) क्यों महत्वपूर्ण है?
    शास्त्रों के अनुसार पद्मिनी एकादशी की रात्रि में जागरण करने से अग्निष्टोम यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। रात में भजन, कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और कथा-श्रवण करें। यह आत्मिक जागृति का प्रतीक भी है।

🙏 निष्कर्ष – Conclusion

Padmini Ekadashi 2026 (पद्मिनी एकादशी) एक अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी अवसर है। 27 साल बाद ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग आपको आध्यात्मिक उन्नति, पाप-मुक्ति, धन-समृद्धि और मोक्ष की ओर ले जाने वाला है।

27 मई 2026 को श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करें। भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख, शान्ति और समृद्धि आए – यही हमारी कामना है।

🙏 हरि ॐ तत् सत् 🙏
जय श्री हरि विष्णु | जय माँ लक्ष्मी

यह लेख धार्मिक ग्रन्थों और पंचांग के आधार पर तैयार किया गया है। तिथि और समय की पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग से करें।

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