Putrada Ekadashi 2025: पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

Devout Hindu couple performing Putrada Ekadashi vrat prayer for a child, with Lord Vishnu's blessing at dawn.

साल का वो अंतिम दिन जब पुरानी स्मृतियां विदा ले रही होती हैं और नए संकल्प जन्म लेते हैं। उस समय आती है पौष पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi)। यह तिथि मात्र एक व्रत नहीं बल्कि पूरे वर्ष की अंतिम एकादशी है जो हमें याद दिलाती है कि समय कितना अमूल्य है।

हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है जो बताती है कि हमारी आत्मा का असली लक्ष्य क्या है। यह उपवास हमें केवल अन्न त्यागना नहीं सिखाता बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण पाकर जीवन को सही दिशा में मोड़ने की प्रेरणा देता है।

पौष पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) की कथा बड़ी ही हृदय विदारक है जो भविष्योत्तर पुराण के पन्नों में समाई है।

भद्रावती नगरी में राजा सुकेतु मान और उनकी रानी शैव्या रहते थे। उनके राज्य में अपार धनधान्य था। सुख शांति थी पर एक गहरा खालीपन था। उनके आंगन में कोई किलकारी नहीं गूंजती थी। पुत्रहीन होने का दुख राजा को भीतर से जलाता था। उन्हें चिंता थी कि उनके बाद उनके वंश को आगे कौन बढ़ाएगा और कैसे मोक्ष मिलेगा। यह चिंता उन्हें चैन से बैठने नहीं देती थी।

एक दिन शिकार के बहाने राजा अपने मन के दुख से दूर भागना चाहते थे और जंगल में भटकते हुए उन्हें प्यास सताने लगी। वे भटकते-भटकते एक सुंदर सरोवर के पास पहुंचे जहां उन्होंने कई मुनियों को वेद पाठ करते देखा। यह दृश्य देख राजा को बड़ी शांति मिली।

राजा सुकेतु मान ने श्रद्धा से मुनियों को प्रणाम किया और उनसे अपनी वेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा उनका जीवन राजपाट होते हुए भी व्यर्थ है क्योंकि उनके कोई संतान नहीं है।

व्रत का संकल्प और फल

मुनियों के मुखिया ने राजा को संतावना दी और बताया, “हे राजन! आप भाग्यशाली हैं। आज पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) है। आप आज ही श्रद्धा पूर्वक इसका व्रत करें तो आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।”

राजा ने बिना देर किए मुनियों के चरणों में शीश झुकाया और वहीं व्रत का संकल्प लिया। उन्होंने सरोवर के जल से स्नान किया। भगवान विष्णु का विधिवत पूजन किया और रात भर जागरण कर भगवान के नामों का स्मरण किया।

अगले दिन पारण कर उन्होंने मुनियों का आशीर्वाद लिया और अपने महल को लौटे। इस पुत्रदा एकादशी व्रत (Putrada Ekadashi vrat) के पुण्य प्रभाव से कुछ ही समय में रानी शैव्या ने गर्भधारण किया और उन्हें एक तेजस्वी धर्मात्मा पुत्र की प्राप्ति हुई।

पुत्रदा एकादशी व्रत के लाभ

यह व्रत केवल कथा नहीं है। यह एक अद्भुत वरदान है। पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) का व्रत करने से मिलने वाले लाभ:

  • संतान सुख: जो भी दांपत्य संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें यह एकादशी का व्रत करने से निश्चित रूप से योग्य संतान की प्राप्ति होती है।

  • पाप मुक्ति: इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं।

  • सुख-समृद्धि: उसके जीवन में सुख समृद्धि आती है।

  • मोक्ष की प्राप्ति: अंत में वह मोक्ष को प्राप्त करता है।

यह एकादशी भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लाभों को देने वाली है।

आध्यात्मिक संदेश: जीवन का अंतिम लक्ष्य

अंत में, पौष पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) हमें जीवन के सबसे बड़े सत्य की ओर ले जाती है। मनुष्य का जन्म बड़ा ही दुर्लभ और अनमोल है। हमें 84 लाख योनियों के बाद यह अवसर मिला है।

सांसारिक सुख-दुख तो आते जाते रहेंगे। लेकिन जीवन का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य है गोलोक धाम वापस लौटना। पुत्रदा एकादशी हमें यह मौका देती है कि हम सांसारिक उलझनों को छोड़कर, एक दिन के लिए ही सही, पूरी तरह भगवान की भक्ति में लीन हो सकते हैं और अपनी आत्मा को उसके असली घर यानी परमधाम की ओर मोड़ सकते हैं।

यह एकादशी केवल संतान प्राप्ति की नहीं बल्कि जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति की राह भी दिखाती है।

Happy Ekadashi and a very Happy New Year! 

हरे कृष्ण राधे राधे।

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